धरती और अंतरिक्ष में एक बुनियादी अंतर है. वहाँ वातावरण नहीं होता. यानी जैसे धरती पर चारों और हवा की परत है वैसी हवा वहाँ नहीं होती. धरती पर तापमान को नियंत्रित रखने में हवा की काफी बड़ी भूमिका होती है. अंतरिक्ष में आपका कितना तापमान से सामना होगा, यह आपकी स्थिति पर निर्भर करेगा. यानी आप कहाँ हैं.
यदि आप धरती की कक्षा में हों और चक्कर लगा रहे हों, तो जब आपके ऊपर धूप होगी, तब तापमान 122 डिग्री या इससे ज्यादा हो सकता है. जैसे ही आप घूमकर कक्षा के उस हिस्से में पहुँचेंगे जहाँ से आपके ऊपर धूप नहीं पड़ रही होगी तो तापमान शून्य से 180 डिग्री तक पहुँच जाएगा. यानी धूप हटी तो आप जम जाएंगे.
यह तो पृथ्वी की कक्षा की बात हुई. यदि आप धरती की कक्षा से निकल कर सूर्य की तरफ बढ़ेंगे तो तापमान बढ़कर इतना ज्यादा हो जाएगा कि आप देखते ही देखते स्वाहा हो जाएं. इसके विपरीत यदि आप सूर्य के दूर जाएंगे, तब तापमान घटेगा. प्लूटो के बाद अंतरिक्ष में तापमान 270 डिग्री से भी कम मिलेगा. इस तापमान को अंतरिक्ष विज्ञान की भाषा में ‘कॉस्मिक बैकग्राउंड टेम्परेचर’ कहा जाता है. यानी अंतरिक्ष का सामान्य तापमान.
Reviewed by Manish saini
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2:15 pm
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